जानिए कौन से पांच गाँव थे जिनके वजह से महाभारत का युद्ध हुआ था ?
12 सालो का ज्ञात्वास और 1 साल का अज्ञातवास का सर्त पूरा कर लेने पर भी जब कौरवो ने पांडवो को उनका राज्य देने से मना कर दिया तब , पांडवो को युद्ध करने के लिए बाधित होना परा | पर इतना होने के बाद भी स्वयं श्रीकृषण ने कहा की दुर्योधन को एक अंतिम अवसर अवस्य देना चाहिए , इसलिए
श्रीकृषण पांडवो के तरफ से कुरु राज्यसभा में शांतिदूत बनकर गए और
दुर्योधन से पांडवो को केवल 5 गाँव देकर युद्ध टालने का प्रस्ताव
रखा |
लेकिन दुर्योधन ने पांडवो को सुई के नोख बराबर जितना भूमि भी देने से मना
दिया |
वो पांच गाँव जिनको न देने के कारन हो गया काैरवो का पतन 👇
1. इन्द्रप्रस्थ
2. व्याघ्प्रस्थ
3. स्वर्न्प्रस्थ
4. पान्दुप्रस्थ
5. तिल्प्रस्थ
ׅइन्द्रप्रस्थ - "जब पांडवो और कौरवो के बिच सम्बन्ध खाब हो गये तो ध्रितराष्ट्र ने यमुना के किनारे खान्दव्प्रस्थ क्षेत्र पांडवो को देकर अलग कर दिया था | यह क्षेत्र बहुत ही दुर्गम था , यहाँ की जमीन भी उपजाऊ नहीं थी, लेकिन पांडवो ने इस उजार क्षेत्र को आबाद कर दिया | इसके बाद पांडवो ने रावन के ससुर और महान शिल्पकार मायासुर से निवेदन कर यहाँ सुन्दर नगरी बसाई , जिसका नाम इन्द्रप्रस्थ रखा गया |"
ׅव्याघ्प्रस्थ - "महाभारत काल के व्याघ्प्रस्थ को आज का बाघ्पथ कहा जाता है | इसी जगह दुर्योधन ने लाक्षागृह का निर्माण करवा कर पांडवो को मारने की साजिश रची थी |"
स्वर्णप्रस्थ - "स्वर्णप्रस्थ का मतलब (सोने का शहर) , महाभारत का स्वर्णप्रस्थ आज सोनीपत के नाम से जाना जाता है | समय के साथ महाभारत का स्वर्णप्रस्थ , सोनेप्रस्थ बना और फिर सोनीपत कहलाया |"
इसी पानीपत के पास कुरुक्षेत्र स्तिथ है , जहा महाभारत का युद्ध हुआ था |"
तिल्प्रस्थ - "तिल्प्रस्थ नाम का यह गाँव आज तिलपत नाम से जाना जाता है | ये हरयाणा के फरीदाबाद जिले का एक क़स्बा है|"



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